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Tweet Your Love Story Contest जीत कर दें अपने वैलेंटाइन को तोहफा

"प्यार की दो चार घड़ी होती है... चाहे थोड़ी भी हो ये उम्र बड़ी होती है... "
वाकई हेमंत दा के मुंह से यह गीत सुनना हर बार एक नायाब अनुभव होता है.
प्यार का इजहार करने के लिए लोग लंबे लंबे खत लिखा करते हैं, और कुछ हैं कि चुप रह कर ही सब कुछ कह देते हैं.
एक बीच का रास्ता भी होता है... नपे तुले शब्दों में अपनी बात कहने का. वैसे भी आज की फटाफट स्टाइल में इससे ज्यादा मुमकिन नहीं होता.
पेंगुइन इंडिया ने एक प्रतियोगिता आयोजित की है.

उन्हें मनाना इतना भी मुश्किल नहीं

सिर्फ वैलेंटाइन डे ही नहीं, फरवरी का पूरा महीना प्यार के नाम होता है. प्यार के इस खास दिन का काउंट डाउन शुरू हो चुका है. अगर इस वैलेंटाइंस डे को खास बनाने का ख्याल है तो आपको अभी से तैयारी में जुट जाना होगा. अभी आपके हाथ में पूरे दो हफ्ते हैं.
इस पीरियड के हर लम्हे को कोशिश करें कि इतना खास हो कि मेमोरी में यह लाइफ टाइम बिलकुल फ्रेश महसूस हो.

आई मिस यू

बुलेटिन ऑन एयर होने का समय हो गया था...फाइनल टच देने में लगा था कि फोन की घंटी बजी... रिसेप्शन से फोन था... “आप से मिलने एक लड़की आयी है...” “बस दो मिनट में आया” बोलकर काम में लग गया...भूल गया और आधे घंटे बाद जब फिर फोन की घंटी बजी उससे मिलने पहुंचा...देखते ही अचानक बोल पड़ा... “सुभान अल्लाह !!!” बला की खूबसूरत...जैसे खुदा ने फुरसत में बनाया हो...खुद अपने हाथों से...एक पल के लिए मैं कहीं और खो गया...और एक टक उसको देखता रहा...वह भी शर्मा गयी...मेरी भी कही जाय तो वही हालत...दोनो एक दूसरे को निहार रहे थे...दुनिया को भूल गये...खामोशी तोड़ती हुई वह बोली... “मैं मोना...फोन पर आप से बात हुई थी” “अच्छा-अच्छा...कैसी हैं आप?, ये वाक्य मन में तो आया लेकिन जुबान पे नहीं, आता भी कैसे...जब नजर काम करती है...तो जुबां अपने आप ठहर जाती है... “फाइन...” यह भी बोला या सुना नहीं गया...बस महसूस हुआ... तभी वह अपना रिज्यूमे निकाल कर दिखाने लगी...और पढ़ाई-लिखाई काम काज के बारे में बातें होती रहीं...वह बोलती जा रही थी...और मैं सुनता जा रहा था...मेरा ध्यान मोना की आवाज से कहीं ज्यादा उसके चेहरे पर टिक गया था...मैं उसकी हर बात पर बस हां हां करता जा रहा था...लेकिन ध्यान तो एक ही जगह था...एकदम से उसके रूप माधुर्य में खो सा गया…एक घंटा कैसे गुजर गया पता ही नहीं चला...फिर मिलने और फोन करने की बात हुई...वो मेन गेट से बाहर निकली...और मैं न्यूज रूम की ओर...न्यूज रूम में आने के बाद भी...जैसे हम वहीं थे...रिसेप्शन पर...एक दूसरे को निहारते हुए...और कहीं मन नहीं लग रहा था...बस मोना ही मोना छायी हुई थी...तब पता चला कि एक नजर में भी प्यार होता है...जब वो दिल में छा गयी तो फिर फोन पर बात करने...चैट...मिलने जुलने का सिलसिला भी शुरू हो गया कई बार मिले...लगता ही नहीं कि हम दोनो कभी अलग रह पाएंगे...उसके बिना दिन और रात काटे नहीं कटते...अपने बॉस से मिलकर उसके लिए नौकरी की बात भी कर ली...तय हो गया कि उसको रख लेंगे...लेकिन दफ्तर में ऐसा उलटफेर हुआ कि बॉस ही बॉस नहीं रहे...सब होते होते रुक गया...इसी बीच मुंबई से उसे एक बढ़िया ऑफर मिला...एक बड़े चैनल से...
आखिर दिल्ली में कब तक खाली रहती...कर ली ज्वाइन...चली गयी मुंबई...और फिर शुरू हो गया मीडिया की नौकरी में सांस न लेने वाले काम का दौर...
उसे तीन साल की ट्रेनिंग पर लंदन भेज दिया गया...दो शहरों के बीच की दूरी...जैसे दिल की दूरी बनती गयी...दोनो एक दूसरे से चाह कर भी नहीं मिल पाते...ऐसे में जबकि एक पल की दूरी भी नागवार गुजरे...तीन साल...Mona, I miss you a lot.

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