"प्यार की दो चार घड़ी होती है... चाहे थोड़ी भी हो ये उम्र बड़ी होती है... "
वाकई हेमंत दा के मुंह से यह गीत सुनना हर बार एक नायाब अनुभव होता है.
प्यार का इजहार करने के लिए लोग लंबे लंबे खत लिखा करते हैं, और कुछ हैं कि चुप रह कर ही सब कुछ कह देते हैं.
एक बीच का रास्ता भी होता है... नपे तुले शब्दों में अपनी बात कहने का. वैसे भी आज की फटाफट स्टाइल में इससे ज्यादा मुमकिन नहीं होता.
पेंगुइन इंडिया ने एक प्रतियोगिता आयोजित की है.
वाकई हेमंत दा के मुंह से यह गीत सुनना हर बार एक नायाब अनुभव होता है.
प्यार का इजहार करने के लिए लोग लंबे लंबे खत लिखा करते हैं, और कुछ हैं कि चुप रह कर ही सब कुछ कह देते हैं.
एक बीच का रास्ता भी होता है... नपे तुले शब्दों में अपनी बात कहने का. वैसे भी आज की फटाफट स्टाइल में इससे ज्यादा मुमकिन नहीं होता.
पेंगुइन इंडिया ने एक प्रतियोगिता आयोजित की है.
